समंदर नहीं जाॅर्ज बुश हैं आयलान के असली कातिल...



यह तस्वीर कुछ दिनों पहले मुझे फेसबुक पर मिली। इस पर कोई टिप्पणी करने से पहले मैंने इससे जुड़ी कई बातों को जानने की कोशिश की और थोड़ा इंतजार किया। तस्वीर में इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन उस बच्चे की लाश को गोद में लिए हैं जिसकी समुद्र में डूबने से मौत हो गई थी।
वह सीरिया का एक प्यारा बच्चा था जिसका नाम आयलान था। वह बहुत खूबसूरत बच्चा था लेकिन खूबसूरती से ज्यादा उसकी मौत के चर्चे रहे। आखिर आयलान और उस जैसे हजारों सीरियाई बच्चाें की जिंदगी इतनी छोटी क्यों हो गई?

1- आईएसआईएस, अलकायदा, तालिबान और कहां-कहां तक नाम याद रखें! वहां आम लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि खुद को आईएसआईएस से बचाएं या बम के उन धमाकों से जिनकी गंध इराक और सीरिया की फिजा में घुल चुकी है!और जाना चाहें तो जाएं कहां? सीरिया और इराक का नाम सुनते ही दुनिया बिदकती है। ऐसे में रास्ता समंदर से निकले या जमीन से, जान सलामत रखने के लिए लोग उसे जोखिम में भी डालने को तैयार हैं।

2- .. यही सब आयलान की मौत के पीछे है लेकिन सब पर्दों के पीछे एक और चेहरा है जिसे लोग अभी तक भूले नहीं हैं। मैं आयलान की मौत के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जाॅर्ज डब्ल्यू बुश को जिम्मेदार मानता हूं। उन्हें जंग से मुहब्बत थी और उनकी ये मुहब्बत लाखों लोगों के लिए मौत का पैगाम लेकर आई।

3- श्रीमान बुश ने इराक के लोगों को लोकतंत्र के नाम पर खंडहरों के जो ढेर तोहफे में दिए हैं उनकी छाया सीरिया तक पहुंच गई है। मैं श्रीमान बुश का बहुत सम्मान करता हूं लेकिन उनसे पूछना चाहता हूं कि ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्होंने इराक पर हमला किया? जो मानव संहारक भयंकर अस्त्र ढूंढने आपकी सेना इराक गई थी उन्हें जमीन निगल गई या दीमक खा गई?वास्तव में जाॅर्ज बुश का हठ मुझे उस बच्चे की जिद जैसा लगता है जिसे हर कीमत पर अपना मनपसंद खिलौना चाहिए। इराक में न तो वे अस्त्र मिले और न वहां कोई मजबूत लोकतंत्र लागू हुआ।

4- सद्दाम हुसैन की फांसी के बाद बनी विस्फोटक स्थिति का खामियाजा इस इलाके को भुगतना पड़ रहा है। उसका असर सीरिया तक जा पहुंचा है और लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं। मुझे इराक-सीरिया के इन शरणार्थियों तथा कश्मीरी पंडितों में ज्यादा फर्क नहीं लगता। ऐसा ही हाल कश्मीरी पंडितों का भी हुआ था।

5- सीरिया और इराक के मौजूदा हालात के लिए वहां का शासन भी कम जिम्मेदार नहीं है। असल में वे लोग चाहते ही नहीं कि उनके यहां अमन कायम हो। जब योग्य और शक्तिशाली राजा नहीं होता तो अनेक राजा सिर उठाने लगते हैं ... और गुंडे-उठाईगिरे भी खुद को अपने इलाके का सुल्तान घोषित कर देते हैं।आईएसआईएस हो या अलकायदा, ये इसी श्रेणी के गुंडों के गुट हैं जिन्हें इंसाफ और अमन से कोई मतलब है। जो उनकी बात नहीं मानता, उसे गर्दन कटाने के लिए तैयार रहना पड़ता है। ऐसे इंसाफ से भगवान बचाए।

6- सद्दाम हुसैन तानाशाह थे। उनके कर्इ फैसले अतिउत्साह से लिए गए थे लेकिन यह भी सच है कि अगर इराक पर उनका शासन होता तो आर्इएसआर्इएस, अलकायदा के कदम इराक की धरती पर मजबूत नहीं होते। इस लोकतंत्र से तो सद्दाम का शासन ज्यादा बेहतर था।

... लेकिन इराक और सीरिया के हालात आज जिस तरह से उलझे हुए हैं वहां जरूरी है कि शक्तिशाली देश आम सहमति के साथ अपनी सेना भेजें और स्थानीय तंत्र को मजबूत बनाया जाए। आईएसआईएस का हर कीमत पर खात्मा जरूरी है। अगर ये एशिया में फैल गए तो पूरी दुनिया को जहन्नुम बना देंगे।

- राजीव शर्मा, कोलसिया -

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