रुकिए.. इन्हें ज़रा गौर से देखिए

इन दोनों तस्वीरों को गौर से देखिए। शायद आप कहेंगे कि जो वृद्घ अम्माजी हैं वे इस खूबसूरत लड़की की दादी या मां होंगी। जी नहीं, ये दोनों तस्वीरें एक ही शख्स की हैं।

झुर्रियों से भरा यह चेहरा किसी समय बहुत खूबसूरत था। तब लाखों लोग इनके दीवाने हुअा करते थे। इनका नाम प्रमिला एस्थर था आैर ये 1947 में पहली Miss India बनी थीं।

शायद अब इन्हें बहुत कम लोग जानते होंगे लेकिन उस जमाने में एेसा कोर्इ अखबार नहीं था जिसके पहले पन्ने पर इनकी तस्वीर न छपी हो।

अखबारों में छपी वे तस्वीरें कर्इ किताबों के कवर पर सजी होंगी, इनके हुस्न पर मर-मिटने वालों के बटुआें में रही होंगी।

6 अगस्त 2006 को इनकी मौत हो चुकी है। इतने अरसे बाद शायद वे किताबें बिखर चुकी होंगी, वे बटुए वक्त के साथ खाली हो चुके होंगे। उन आर्इनों की चमक भी धुंधली पड़ गर्इ होगी जिनमें कभी इस Miss India ने अपना बेहद खूबसूरत चेहरा देखा था।

इनका नाम आैर दुनिया को अलविदा कहने की यह तारीख मुझे इसलिए याद रही क्योंकि 6 अगस्त को मेरा जन्मदिवस भी आता है।
एक इन्सान के लिए जो तारीख दुनिया के सफर का पहला दिन है वही दूसरे के लिए आखिरी सफर का पैगाम। वक्त के साथ सबकुछ धूल में मिल जाता है। सिर्फ नेकी आैर हमारे काम ही जिंदा रहते हैं।

इसलिए कभी अपनी शौहरत, दौलत, ताकत, सूरत, हुनर आैर अक्लमंदी का घमंड नहीं करना चाहिए। जो मुझे आैर आपको बना सकता है, वह बहुत आसानी से मिटा भी सकता है।


- राजीव शर्मा, कोलसिया -

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