अगर मुगल बादशाह लुटेरे थे तो मौत के बाद वे दौलत कहां ले गए?





पाठक ध्यान दें, कोई टिप्पणी करने से पहले मेरे 3 सवाल जरूर पढ़ लें

कभी पढ़ा था और कई बार सुना था कि राजा-बादशाह कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसकी हुकूमत हमेशा के लिए नहीं होती। सनातन सत्ता सिर्फ परमात्मा की होती है। जिस सिकंदर के नाम से कभी दुनिया थर्राती थी आज उसका सिंहासन टूट कर धूल में मिल गया है।

महाराजा अशोक की वह तलवार जो रणभूमि में बिजली की तरह चमकती थी, आज कहां विलीन हो गई, कोई नहीं जानता। कभी मुगल बादशाहों के नाम का डंका पूरी दुनिया में बजता था लेकिन आखिरी शहंशाह बहादुर शाह जफर ने अपने घर से दूर आखिरी सांस ली और वे अपने वतन की मिट्टी के लिए भी तरसते रह गए।

इतिहास की कहानी बयान करने वाले ऐसे कई कागज हैं जिनकी स्याही वक्त के साथ मिट गई। कई कागज ऐसे भी हैं जिन पर नई कहानी लिखने के लिए स्याही तैयार हो रही है और उन्हें ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा।

कल शाम को मैंने एक वेबसाइट पर ऐसे लोगों की कहानियां पढ़ीं जिनके पूर्वज राजा-महाराजा थे लेकिन अब वे बेहद मामूली जिंदगी गुजार रहे हैं। उनमें से एक परिवार का मैं आज जिक्र करना चाहूंगा।

इस परिवार का संबंध मुगल बादशाहों से है। सुल्ताना बेगम नामक ये महिला बहादुर शाह जफर के परपोते की बहू हैं। उनका परिवार जफर की तस्वीर अपने साथ रखता है और उन पर गर्व भी करता है।

कहानी यहीं पूरी नहीं होती। सुल्ताना बेगम कलकत्ता के एक बहुत साधारण घर में रहती हैं और उनकी कमाई बहुत ही कम है। इन दिनों वे पेंशन पर गुजारा कर रही हैं।

वेबसाइट पर शाहजहां के शासन काल का भी उल्लेख किया गया है और बैंक आॅफ इंग्लैंड की रिपोर्ट के संदर्भ से बताया गया है कि उस जमाने में हमारे रुपए की ताकत आज के मुकाबले 500 गुना ज्यादा थी। जी हां, यह बात मैं नहीं कह रहा, बैंक आॅफ इंग्लैंड कह रहा है।

आज जब रुपया डाॅलर के मुकाबले गिरने के नए रिकाॅर्ड कायम कर रहा है तो बैंक आॅफ इंग्लैंड की इस रिपोर्ट पर बहुत आश्चर्य होता है। साथ ही 3 सवाल भी आपसे करना चाहूंगा। अगर चाहें तो जवाब दे सकते हैं। अगर न चाहें तो बंदिश नहीं।

1- कहा जाता है कि मुगल बाहर से आए थे, वे लुटेरे थे, उन्होंने हिंदुस्तान को लूटने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। अगर ऐसा था तो उस जमाने में हमारा रुपया इतना मजबूत कैसे हो सकता है? क्योंकि अगर किसी देश में मारकाट, लूट और दहशत का माहौल होता है तो उसकी अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाती है, मुद्रा कमजोर हो जाती है और उद्योग-धंधे चौपट हो जाते हैं।

2- अगर मुगल बादशाह बेईमान, डकैत और लुटेरे थे तो उन्होंने भारत का धन जरूर विदेशों में भेजा होगा। यह बात इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इन दिनों कालेधन को लेकर बहुत मुद्दे उठाए जा रहे हैं। बेईमान और भ्रष्ट आदमी दौलत को सबसे पहले ऐसी जगह भेजता है जहां वह सुरक्षित रहे। वह खुद उसका उपभोग करे और उसके बाद उसकी पीढ़ियां दौलत से गुलछर्रे उड़ाएं।

हमारे कई राजनेताओं पर कालेधन और स्विस बैंकों से संबंध के आरोप लगाए जाते हैं। अगर मुगल बादशाह भ्रष्ट थे तो उन्होंने जरूर उसे कहीं जमा किया होगा। क्या उनका किसी स्विस या विदेशी बैंक में अकाउंट था?

अगर उस जमाने में बैंक जैसी व्यवस्था विकसित नहीं थी तो भी वे ऐसा कोई प्रबंध जरूर कर जाते जिससे उनकी पीढ़ियां ऐश करतीं। अगर उन्होंने ऐसा किया तो मुगल परिवार के ये लोग आज इतने गरीब क्यों हैं? उनके पास तो अरबों की दौलत होनी चाहिए थी। क्या मुगल वो दौलत अपने साथ ले गए, जबकि उनमें से ज्यादातर इसी हिंदुस्तान की मिट्टी में दफनाए गए थे?

3- मुगल बादशाहों के बारे में कहा जाता है कि वे विदेशी लोग थे जिन्हें भारत से कोई प्रेम नहीं था। अगर यह बात मान भी लें कि वे भारत से नफरत करते थे और विदेशी शासक तो आता ही लूटने है, लेकिन अब तो स्वदेशी शासन है। देश में भारतीय मुख्यमंत्री हैं और भारतीय प्रधानमंत्री है, फिर भी भारत के सरकारी दफ्तरों में लूट का सिलसिला बदस्तूर जारी क्यों है?

शायद आप मुझसे बेहतर जानते हों, इसलिए इन सवालों के जवाब आपसे पूछ रहा हूं। मेरा मकसद न तो मुगल बादशाहों को अच्छा बताना है और न बुरा साबित करना। हर शासन के गुण-दोष होते हैं और मैं सिर्फ तथ्यों के आधार पर ये सवाल कर रहा हूं।

- राजीव शर्मा, कोलसिया -

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