शुक्र मनाइए र्इधी साहब कि हमने आप पर स्याही नहीं फेंकी


भारत की बेटी गीता की वतन वापसी के बाद खुशी का माहौल है। इन सबके बीच मैं धन्यवाद कहना चाहूंगा र्इधी फाउंडेशन के श्री अब्दुल सत्तार र्इधी साहब को।

न सिर्फ इसलिए कि उन्होंने एक एेसी भारतीय बच्ची की परवरिश की जो बोल नहीं सकती आैर वे उसकी आवाज बने, बल्कि इसलिए कि उन्होंने उसकी परवरिश में धर्म आैर मजहब जैसी बातों को कभी आड़े नहीं आने दिया।

आज दुनिया में नफरत बेचने का जो कारोबार चल रहा है, खासतौर से धर्म आैर राजनीति के गठजोड़ से फैलने वाला कट्टरपंथ, जो पाकिस्तान, भारत आैर बांग्लादेश में गहरी जड़ें जमा चुका है।

एेसे में र्इधी साहब ने गीता की जिस तरह से परवरिश की, उसके धर्म का सम्मान किया है, उसके लिए अलग कमरे में हिंदू विधि से पूजा की व्यवस्था तक की, मैं परमात्मा के इस नेक बंदे को सलाम करता हूं।

गीता उनके पास जितनी सुरक्षित थी उतनी तो अपनी मां की गोद में भी नहीं रही होगी। खबरों के अनुसार, र्इधी फाउंडेशन दुनिया की सबसे बड़ी एंबुलेंस सर्विस चलाता है। इसके अलावा कर्इ परोपकारी कार्यों के लिए र्इधी साहब को अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वे बहुत विनम्र व्यक्ति हैं।

मुझे ताज्जुब है कि दुनिया में एेसे लोग भी हो सकते हैं! शायद फरिश्ते आज भी रास्ता भूलकर इस दुनिया में चले आते हैं, वर्ना नफरत आैर दहशत देखकर कौन इन्सान यहां आना चाहेगा! भगवान र्इधी साहब को लंबी उम्र आैर अच्छी सेहत दे। एेसे लोगों का दुनिया में होना जरूरी है।

मैं सवाल करना चाहूंगा उन लोगों से जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश या दुनिया के किसी भी हिस्से में रहते हैं। क्या तुम जानते हो कि धर्म क्या होता है, सच्चा दीन क्या होता है आैर इबादत क्या होती है?

अगर जानना चाहते हो तो पाकिस्तान के इस शख्स को देखो जिसने इन बातों का न केवल सही मतलब समझा, बल्कि उन्हें जिंदगी में भी उतारा।

हम मजहब के नाम पर किसी बेगुनाह को कत्ल करने में खुद की शान समझते हैं, भले ही हमारा देश हिंदुस्तान हो या पाकिस्तान या बांग्लादेश ... तीनों जगह एक जैसे ही हालात हैं आैर इन सबके जिम्मेदार केवल इन देशों में रहने वाले लोग हैं।

यह इबादत नहीं है, यह पूजा नहीं है, यह समझदारी नहीं है, यह सरासर गलत है आैर बड़ा गुनाह है। ... आैर हर गुनाह का बदला हमें मिलकर रहेगा। आज हिंदुस्तान में कर्इ लोग उस देश का सपना ले रहे हैं जिसमें एक भी एेसे व्यक्ति को जिंदा रहने का हक नहीं होगा जो उनकी बात न माने, कुछ लोग एेसे आजाद मुल्क का खाब देख रहे हैं जिसमें एक भी काफिर जिंदा नहीं रहेगा।

इन लोगों ने देश को सर्कस बना दिया है आैर पूरी दुनिया हमें देखकर अपना मनोरंजन कर रही है। लेकिन मत भूलो, एेसे ही हालात देखकर बाहर से कोर्इ रिंग मास्टर भी आ जाता है जिसकी चाबुक से सर्कस के कर्इ बब्बर शेर पिंजरे की बिल्ली बन जाते हैं। ज्यादा दूर मत जाइए, बस 1947 से पहले का इतिहास उठाकर देख लीजिए।

एेसे हालात में शुक्र मनाइए र्इधी साहब कि हमने आप पर स्याही नहीं फेंकी, क्योंकि लखनऊ हो या लाहौर, हम सब एक जैसे हैं।

- राजीव शर्मा, कोलसिया - 

Like My Facebook Page


Comments

  1. ईधि फाउंडेशन ने 1 करोड़ की धनराशि सहर्ष स्वीकार की है ... लेख को सुधार की आवश्यकता है ...

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

मारवाड़ी में पढ़िए पैगम्बर मुहम्मद साहब की जीवनी

आखिरी हज में पैगम्बर मुहम्मद साहब (सल्ल.) ने पूरी दुनिया के नाम दिया था यह पैगाम

A-Part of Ganv Ka Gurukul