नेताजी, अच्छा होता अगर आप हमें आजादी न दिलाते



सिपाही का सपना - यह 1948 में आर्इ एक फिल्म थी। यहां डाॅक्टर जिस मरीज की जांच कर रहा है उसके पीछे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर है।

इतने वर्षों बाद जब इस फिल्म के नाम का जिक्र कर रहा हूं तो लगता है कि उस महान सिपाही का सपना अधूरा ही रह गया। जिसने मातृभूमि को स्वतंत्र कराने के लिए अपने रक्त से आहुति दी थी, आज का हिंदुस्तान उस महान आत्मा को भूल गया।

जिसने आजाद हिंद का एक खाब देखा था वह एेसा हिंदुस्तान तो बिल्कुल नहीं चाहता था जैसा आज है। आजाद भारत के इतिहास में सबसे बड़ी भूल आजादी के तुरंत बाद लोकतंत्र को लागू करना था। भारत के लिए अंग्रेज जितने बेरहम थे उससे ज्यादा यहां के हुक्मरान बेर्इमान निकले।

नेताजी, जब भारत को इन्हीं नेताआें के भरोसे छोड़कर जाना था तो अंग्रेज क्या बुरे थे? इससे तो अच्छा होता कि दूसरे महायुद्घ के बाद भी यहां ब्रिटिश हुकूमत कायम रहती। कम से कम आजादी के मकसद से हम लोग एकजुट तो रहते।

- राजीव शर्मा, कोलसिया -

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