इस पुलिसवाले की कहानी पढ़कर हमारे बेईमान पुलिसकर्मियों को कुछ शर्म तो आनी चाहिए


चेतावनी- मेरा यह लेख सिर्फ बेईमान और बेरहम पुलिसकर्मियों की काले करतूताें पर आधारित है। कृपया ईमानदार और सत्यनिष्ठ पुलिसकर्मी इससे विचलित न हों। वे विवेक तथा संयम से इसे पढ़ें, क्योंकि यह उनके बारे में नहीं है।

यूपी पुलिस द्वारा एक बुजुर्ग टाइपिस्ट को पीटने और उसका टाइपराइटर तोड़ने की घटना को लोग भूले भी नहीं थे कि हमारी बहादुर पुलिस का एक और कारनामा सामने आ गया। इस बार एक राष्ट्रीय निशानेबाज दिव्यांशु के हाथ की अंगुलियां यूपी पुलिस के कांस्टेबल पदम सिंह ने तोड़ दीं। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि वह दारू के नशे में धुत्त कांस्टेबल को घूस के पैसे देना नहीं चाहता था।

ये लिंक चेक कीजिए- 

मुझे नहीं लगता कि इस जालिम पुलिसवाले का बाल भी बांका होगा। हां, खिलाड़ी का करियर लगभग खत्म ही समझिए। कृपया इस भ्रम में न रहें कि पुलिस की बेरहमी के रिकाॅर्ड सिर्फ यूपी में ही टूटते हैं। हमारे राजस्थान की पुलिस भी इससे कम नहीं है।

पिछले दिनों राजस्थान के एक सरकारी स्कूल की छात्राएं मांग कर रही थीं कि उनके लिए शिक्षक की नियुक्ति की जाए ताकि वे पढ़ाई जारी रख सकें। इसके बदले उनके सिर पर लाठियां पड़ीं। कैसा इन्साफ है इस हुकूमत का जहां शिक्षा की मांग पर भी लाठियां मिलती हैं?

देखिए ये लिंक- 

शायद जनरल डायर भी नर्क से यह दृश्य देखकर रोता होगा कि आजाद भारत की पुलिस तो मुझसे भी ज्यादा क्रूर निकली। मैं तो ब्रिटिश था इसलिए मेरे हाथ जलियांवाला बाग में निहत्थे हिंदुस्तानियों पर गोली चलाते वक्त नहीं कांपे, लेकिन ये पुलिस किस मिट्टी की बनी है जो अपने ही भाई-बहनों का खून पीकर सुकून महसूस करती है!

मगर हमारे हुक्मरानों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि ये लाठियां न तो अखिलेश जी के सिर पर पड़ती हैं, न वसुंधरा जी के, न राहुल जी के और न मोदी जी के।

मैं एक नेक राय देना चाहूंगा हमारी सरकारों को, अगर आपको हिंदुस्तान से और यहां के लोगों से इतनी ही नफरत है तो हर पुलिसवाले को डंडे के साथ ही एक रस्सी भी दे दीजिए ताकि वह मौके पर ही फांसी का फंदा तैयार कर आम लोगों को सजा-ए मौत दे सके।

कुछ माह पहले पुलिस को लेकर मैंने फेसबुक पर किसी सज्जन की आपबीती पढ़ी। उनका नाम मुझे याद नहीं आ रहा। इसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूं। वे मेरी मित्रता सूची में हैं या नहीं, मैं यकीन के साथ नहीं कह सकता। इस घटना का जिक्र करने के लिए मैं उनका आभार जरूर व्यक्त करूंगा।

यह घटना संयुक्त अरब अमीरात की है। वे अपनी गाड़ी से रात करीब 12 बजे दुबई से आ रहे थे। जब वे शेख जैद हाईवे पर पहुंचे तो उनकी गाड़ी का एक टायर पंक्चर हो गया।

वे नीचे उतरे और टायर बदलने लगे। इतने में वहां पुलिस की गाड़ी आ गई। पुलिसवाले ने आते ही उन्हें सलाम किया, फिर परेशानी पूछी।

उन्होंने कहा, गाड़ी में कुछ दिक्कत हो गई है।

इस पर वह बोला, कोई दिक्कत नहीं होगी, अब मैं आ गया हूं।

फिर उसने गाड़ी का टायर बदलने में उनकी मदद की और जाते वक्त उन्हें पानी की एक बोतल भी दी। पुलिस ने उनके साथ अच्छा बर्ताव किया तो उन्होंने भी जाते वक्त उस पुलिसवाले को धन्यवाद कहा और दिल से उसके लिए दुआ की।

यह अनुभव उन्होंने बाद में फेसबुक पर लिखा। मैं इसे उनका सौभाग्य मानता हूं कि उनकी गाड़ी का टायर भारत में पंक्चर नहीं हुआ। अगर ऐसा होता और किसी बेईमान पुलिसवाले से उनका सामना हो जाता तो वह उनकी ऐसी ठुकाई करता कि शायद यह अनुभव लिखने के लिए उनकी अंगुलियां नहीं बचतीं। जाते-जाते वह उनकी जेब भी साफ कर जाता।

मेरी यह बात कुछ पुलिसकर्मियों को बुरी लग सकती है। अगर आप ईमानदार और सत्यनिष्ठा के साथ अपने फर्ज को अंजाम देने वाले पुलिसकर्मी हैं तो मैं आपसे माफी चाहता हूं। मेरी यह टिप्पणी आपके लिए हर्गिज नहीं है। मैं आपको सलाम करता हूं। .. लेकिन अगर आप घूस लेते हैं, किसी निर्दोष को सताते हैं, अपनी वर्दी का रौब दिखाकर अन्याय करते हैं तो यकीन कीजिए यह टिप्पणी सौ फीसदी आपके लिए ही है।

भगवान आपको कभी माफी नहीं करेगा, क्योंकि आप ही की वजह से पुलिस से लोगाें का भरोसा उठ गया है। एक दिन इसका दंड मिलकर रहेगा, क्योंकि आप ही वे लोग हैं जो किसी दामिनी का बलात्कार होने के बाद सिर्फ इस बात के लिए बहस कर सकते हैं कि ये मामला किस थाने का है और आम लोगाें को चक्कर पे चक्कर कटवाते हैं।

.. मैं इस देश के हुक्मरानों से भी यह सवाल पूछना चाहता हूं कि हमारी पुलिस को आप इन्सान क्यों नहीं बनाते? पिछले छह दशक से आप इस काम के लिए किसका इंतजार कर रहे हैं? अगर आप इस काबिल नहीं हैं तो ब्रिटेन की महारानी को खत लिखिए कि भारत को आजादी देना ब्रिटेन की सबसे बड़ी भूल थी। वे फौरन यहां आएं आैर हुकूमत संभालें क्योंकि ये काम हमें नहीं आता।

अगर आप पुलिस को इन्सान नहीं बना सकते तो हमें बेवकूफ बनाना बंद कीजिए और छोड़िए ये गद्दी। ये देश आपके बिना भी चल सकता है।

.. और भ्रष्ट व बेईमान पुलिसवालों को भी सलाह देना चाहूंगा कि शर्म करो, शर्म करो, शर्म करो और कहीं चुल्लू भर पानी मिल जाए तो उसमें डूब मरो।

- राजीव शर्मा, कोलसिया - 

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